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नोटबंदी और भ्रष्टाचार

Posted On: 16 Feb, 2017 कविता में

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भ्रष्टाचार की प्रबलता का कैसे मैं अवगुण गान कॅरू………….
नोटबंदी की असफलता का कैसे मैं बखान कॅरू…………..
एक महान व्यक्ति के, महान संकल्प को इसने चोट पॅहुचाई है……….
तपते स्वर्ण की भट्टी मे इसने खोट पॅहुचाई है…………….
किंतु खोट जरूरी है गहनो की घडाई मे………….
भारत माॅ का हार बनेगा अब पुरी चतुराई से…………….
खोट से ही पता चलेगी खोटे सिक्को की गहराई …………….
इससे ही तो पता चली है एक्सिस वालो की सच्चाई……………
देश मे बैठे गद्दारो ने देश को कैसे लुट लिया………….
स्वयं इसकी संतानो ने देखो देश को चुट लिया………….
मौका पाते ही इन्होने काली कमाई खपाई है………
भ्रष्टतंत्र मे भ्रष्टो ने भ्रष्ट पताका फहराई है…………….
अनभिज्ञता मे कैसी भूल कर रहे हो प्यारे देशवासियो…………..
भारत माॅ के अरमानो की टिमटिमाती बातियो……………
हद हो गई अब तो वास्तविकता जान लो………..
भ्रष्टाचार है देश का दुश्मन इस बात को तुम मान लो………………
भ्रष्टाचार की काली कमाई देश की अर्थव्यवस्था बिगाडती………….
विश्व पटल पर देश की संप्रभुत्ता को खतरे मे डालती…………….
याद करो वो दिन जब देश गुलाम था…………..
बच्चा बच्चा देश का रोटी  का मोहताज था……………..
कडे संघर्ष के बाद टुटी थी जंजीरे गुलामी की……………
लाखो बलिदानो बाद मिली थी बेला हमे आजादी की……………
तब हमने सोचा था ऐसा भारत बनाएगे……………
जिस पर आॅख उठाने से पहले दुश्मन खुद झुक जाएगे………………..
भ्रष्टाचारवश होकर हमने कैसा रंग उडेल दिया……….
निजी स्वार्थ की खातिर देश को पिछे धकेल दिया…………….
दिमक बन कर हमने देश को खोखला कर दिया………..
घुसखोरी की खातिर अपना सर्वस्व ना दाॅव पर लगाओ तुम……………..
समय तुम्हारी मुठ्ठी मे है अब तो भ्रष्टाचार मिटाओ तुम।

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jlsingh के द्वारा
February 18, 2017

सुन्दर सन्देश देती हुई रचना!


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